2022 मे केसे करे अदरक की खेती से कमाई | Ginger farming business plan

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क्या आप भी खेती के जरिए अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हो तो, आज हम आपके लिए एक ऐसा बिजनेस लेके आए हैं. जिसे शुरू करके आप हर साल लाखों रुपए कमा सकते हो.
यह एक ऐसा बिजनेस है जिसकी डिमांड पूरे साल बनी रहती है. बहुत सारे पढ़े लिखे व्यक्ति अपनी नौकरी छोड़ अदरक की खेती से कमाई कर रहे है.

खेती से जुड़े कारोबार के लिए सरकार भी मदत कर रही है. अदरक की डिमांड पूरे साल होने के कारण इसकी खेती से अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है. अदरक का इस्तेमाल चाय, सब्ज़ियों मे,अचार मे आदि जगह किया जाता इस के अलावा इस का उपयोगी औषधियों में भी किया जाता है.

यदि आप अदरक की खेती से लाखों रुपए कमाना चाहते हो तो, हमारे साथ अंत तक बने रहे आज हम आपको अपको अदरक की खेती से कमाई करने की पूरी जानकारी उपलब्ध करवाएंगे.

Ginger farming business

Table of Contents

अदरक की खेती कैसे की जाती है ( how to ginger farming)

यदि आप अदरक की खेती के बारे में पूरी जानकारी लेना चाहते हो तो या फिर अदरक की खेती कैसे की जाती है उसके बारे में जानना चाहते हो तो हमारे द्वारा दी गई जानकारी को पूरा पढ़ें जिससे आपको पता चल जाएगा कि आपको अदरक की खेती कैसे की जाती है

अदरक का उपयोग ( use of ginger)

अदरक का उपयोग मसालों, औषधियों, सुंदर सामग्री में इसका उपयोग किया जाता है. इसके अलावा खुशबू पैदा करने के लिए चाय, सब्जियों, अचार और कई व्यंजनों में उसका उपयोग किया जाता है.

  • औषधियों में: सर्दी, जुखाम, खांसी, पथरी, लीवर, खून की कमी, पेट के रोग, पीलिया, बवासीर, वायु रोगियों बीमारियों को दूर करने के लिए अदरक का उपयोग दवाई के रूप में किया जाता है.
  • मसालों में: सब्जी, चटनी,लड्डू, खीर, सरबत, आदि जगह कच्ची तथा सुखी अदरक का उपयोग किया जाता है.
  • कॉस्मेटिक सामान मे : अदरक का तेल, पाउडर, पेस्ट तथा क्रीम बनाने के लिए भी अदरक का उपयोग किया जाता है.

अदरक की खेती के लिए जलवायु ( Climate for Ginger Cultivation)

अदरक की खेती से कमाई करने के लिए इस की जलवायु का बहुत बड़ा योगदान होता है. अदरक की खेती के लिए आप को गर्म जगह की आवश्यकता होगी. गर्मियों का मौसम अदरक की फसल के लिए अच्छा माना जाता है. क्योंकि गर्मियों के मौसम में अदरक के कंद अच्छे से विकास होते हैं.
अदरक के पौधों को अंकुरित होने के लिए 20 से 25 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है, तथा अदरक के गंध को पकने के लिए 30 से 35 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है.
इसके अलावा भूमि में जल निकासी का प्रबंध होना चाहिए. क्योंकि यदि खेत में पानी जमा होगा तो आप की फसल खराब हो सकती है इसलिए जल निकासी का प्रबंध अवश्य करें.

अदरक की खेती से कमाई के लिए मिट्टी का चयन ( ginger farming soil selection )

अदरक की खेती के लिए मिट्टी का योगदान भी बहुत बड़ा होता है. अदरक की खेती के लिए चिकनी, रेतीली, और लाल मिट्टी को सही माना गया है. लेकीन आपको इस बात का ध्यान रखना है, कि अदरक की खेती एक ही खेत में बार-बार ना करें नहीं तो आप की फसल में कीट जैसे रोग हो सकते हैं. जिससे आप की फसल खराब हो जाएगी अदरक की खेती करने के लिए आपको 6 P.H. वाली जमीन का इस्तेमाल करें और ड्रिप से सिंचाई करें.

अदरक की खेती से कमाई करने के लिए अच्छे बीजों का चयन करें ( Ginger farming choose seeds)

मिट्टी का चयन करने के बाद आपको बीजों का चयन करना होगा. बीज के कंधों को बीज हेतु 6 से 8 महीने वाली फसल में से चयनित करके काट लेना है अच्छे कंद की पहचान2.5-5 सेमी लंबे कंद जिनका वजन 20 से 25 ग्राम हों तथा जिसमें कम से कम तीन गाठ हो. इस तरह बीज का चयन कर लेना है.

अदरक के खेत की जुताई (Ginger farming for plowing the field)

अदरक की रोपाई करने से पहले आपको खेत को तैयार करना होगा. इसके लिए खेत को अच्छी तरह से जुताई करवा ले. उसके बाद खेत को कुछ समय के लिए ऐसा ही छोड़ दें, जिससे खेत की मिट्टी में अच्छी तरह से धूप लग जाए. उसके बाद खेत में पानी छोड़ ना है. पानी छोड़ने के बाद उसे कुछ दिनों के लिए सुखाने के लिए छोड़ना है.

जब खेत ऊपर से सूख जाए तब उसे फिर से रोटावेटर के माध्यम से जुताई करवानी है. जिससे खेत की मिट्टी भूरभुरी हो जाएगी मिट्टी के भुरभुरा होने के बाद खेत में पाटा लगाकर खेत की जुताई कर समतल कर देना है. जिससे खेत में पानी की अच्छी तरह निकासी हो जाएगी इस तरह आप को अदरक की खेती से कमाई करने के लिए खेत तेयार कर लेना है.

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बुवाई का समय ( Ginger cultivation in sowing time)

दक्षिण भारत में अदरक के बुवाई अप्रैल-मई मे की जाती है. जो दिसंबर में जाकर तेयार होती है. जबकि मध्य एवं उत्तर भारत में अदरक का एक शुष्क क्षेत्र है. जिसमें अप्रैल से जून तक का समय बुवाई के लिए योग्य माना जाता है. अदरक की बुआई करने का सबसे अच्छा समय 15 मई से लेकर 30 मई तक का होता है. यदि 15 जून के बाद बुवाई करते हैं तो कंद के सड़ने की संभावना अधिक होती है.
केरल में अप्रैल के स्टार्टिंग में बुवाई करने पर उत्पादन में अधिक वृद्धि की जा सकती. वहीं यदि सिंचाई क्षेत्र में फरवरी माह में बुवाई करने पर अधिक उत्पादन निकाला जा सकता है, और यदि पहाड़ी क्षेत्र में 15 मार्च के आसपास बुवाई करने पर अच्छा उत्पादन निकाला जा सकता है.

अदरक की बुवाई ( sowing ginger)

  • बुवाई के लिए प प्रत्येक कंद के 2 से 3 आंख के साथ 20 से 25 ग्राम का होना चाहिए.
  • बुवाई से पहले कंदो को 2 ग्राम बाविस्टिन मे प्रती किलोग्राम बीज को पानी में 25 से 30 मिनट डुबो कर उपचारित करना चाहिए. इसके बाद उनको छाव मे सुखाकर बुवाई करनी चाहिए
  • अदरक की खेती के लिए एक पोधे से दूसरे पोधे के बीच की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर और एक लाइन से दूसरी लाइन के बीच की दूरी 20 से 30 सेंटीमीटर होनी चाहिए.
  • रोपाई के लिए 5 से 10 सेंटीमीटर की गहराई होनी चाहिए.
  • इसके लिए 23 से 27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर के बीज की आवश्यकता होगी. इसका बीज बहुत महगा आता है. इसलिए आप को खरीद ते वक्त अच्छी तरह देख ले कई कंद खराब तो नहीं है.

अदरक खेती से कमाई करने के लिए खाद एवं उर्वरक ( Ginger cultivation for manures and fertilizers)

अदरक की अच्छी पैदावार के लिए अदरक के खेत मे उर्वरक खाद देना आवश्यक है. खेत में पर्याप्त मात्रा में खाद देने के लिए खेत की मिट्टी की जांच करनी होगी. जिससे खेत की मिट्टी के अनुसार उर्वरक की मात्रा दी जा सके.
खेत की जुताई करते समय 10 से 15 गाड़ी देसी खाद यानी गोबर का खाद डालना होगा और उसे खेत में अच्छी तरह मिला लेना है.
इसके अलावा खेत के आखरी जुताई के समय n.p.k. की मात्रा का छिटकव खेत में करना होगा यदि खेत में जिंक की मात्रा कम है, तो एक हेक्टेयर के हिसाब से 25 KG जिंक डालना होगा. अदरक की रोपाई करने के 40 दिन बाद सिंचाई के साथ 20 kg नाइट्रोजन देना होगा.
इस तरह अदरक की अच्छी पैदावार निकाल ने के लिए खाद की मात्रा देनी होगा.

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अदरक की सिंचाई (ginger irrigation)

अदरक की फसल को अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है. लेकिन इसकी पहली सिंचाई 25 से 30 दिनों के अंदर कर देनी चाहिए. उसके बाद 15 से 20 दिनों के अंदर सिंचाई करें और बारिश के समय आवश्यकतानुसार ही सिचाई करे, क्योंकि बारिश के मौसम में अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है.

अदरक के खेत में खरपतवार पर नियंत्रण करना ( ginger farming for weed control)

अदरक के पौधे नीचे जमीन में रहकर ही पोषक तत्वों का ग्रहण करते हैं. इसीलिए इनके पौधों को खरपतवार से नियंत्रण करना बहुत आवश्यक है. खरपतवार के लिए प्राकृतिक विधि नीराई गुड़ाई करके खरपतवार को कम किया जा सकता है.
अदरक के खेत में आपको दो से तीन बार निराई गुड़ाई करनी होगी. जिससे खरपतवार पर कंट्रोल किया जा सके.

अदरक के पौधे में लगने वाले रोग पर नियंत्रण ( weed control for ginger farming)

अच्छी पैदावार निकालने के लिए आपको समय-समय पर कीटनाशक दवाई का छिटकाव करना होगा.
जैसे:

तना भेदक कीट रोग: यह कीट के रूप में देखने को मिलता है जो लार्वा पौधे के भीतर जाकर तने को खाकर पूरी तरह नस्ट कर देता है. इस रोग के आक्रमण से पौधों को बचाने के लिए मेलाथियान का उचित मात्रा में छिड़काव करना होगा 20 दिन के अंदर 2 से 3 बार छिड़काव करना होगा.

पूर्ण चित्ती रोग: पूर्ण चित्ती नामक रोग का लक्षण पौधों की पत्तियों को खराब करता है. जिससे पत्तियों पर दब्बे दिखाई देने लगते हैं. जिससे यह रोग पूरी पत्ती पर फेल जाता है. जिसके कारण पतिया प्रकाश ग्रहण नहीं कर पाती है और यह पत्तियां को पूरी तरह नष्ट कर देते हैं. इस रोग से पौधों को बचाने के लिए 2 ग्राम गंधक को एक लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करना होगा.
इसके अलावा भी कुछ ऐसे रोग है
जो पौधो को हानि पहुंचा कर पैदावार को कम करता है जैसे विगलन, राईजोम शल्क, जड़ बेधक आदि.

अदरक की खुदाई ( ginger digger)

बुवाई के लगभक 8 से 9 महीने के बाद जब पत्तियां धीरे धीरे पीली होकर सूखने लगे तब अदरक की खुदाई करनी चाहिए. लेकिन ध्यान रहे खुदाई की देरी करने पर प्रकन्दो की गुणवत्ता और भंडारण क्षमता में कमी आ जाती है. जिससे अदरक को अधिक समय से रोकने पर वह अंकुरित होने लगती हैं अदरक की खुदाई कोदाली की सहायता से की जाती है.

आपको अधिक नमी वाले खेत पर खुदाई नहीं करनी है. क्यो की ऐसा करने पर फसल को छती पहुच सकती है. इसीलिए खेत सुख जाने पर ही खुदाई करे.
इस तरह आप को अदरक को भार निकाल लेनी है
अब उसे मार्केट में बेचने के लिए उसपर लगी पत्तियां और धूल मिट्टी को साफ कर लेनी है.

अदरक की खेती से कमाई ( ginger farming profit)

अदरक की फसल लगभग 8 से 9 महीने में तैयार होती है. पौधे की पकने की अवस्था में उसकी बड़वार रुक जाती है. और पौधों की पत्तियां पीली पढ़कर सूखने लगती है. ऐसे में यदि उसे पानी दिया जाए तो भी उसके पौधे की वृद्धि नहीं होगी. ऐसी अवस्था में फसल को खुदाई करने लायक मानी जाती है.
यदि हम अदरक के पैदावार के बात‌ करें तो 1 एकड़ में कम से कम 150 से 200 क्विंटल का उत्पादन किया जा सकता है, और एक एकड़ में लगभग 1 लाख 20 हजार रुपए का खर्च आ सकता है. इस हिसाब से यदि अनुमान लगाया जाए तो 1 एकड़ जमीन में 120 क्विंटल अदरक का उत्पादन आराम से किया जा सकता है. और यदि अदरक की मार्केट रेट की बात की जाए तो यह ₹40 से लेकर ₹80 तक बिकती है. यदि हम ₹40 के रेट से अनुमान लगाएं तो 120 क्विंटल की आमदनी 4 लाख 80 हजार रुपए होती है. इस हिसाब से 1 एकड़ जमीन में सारे खर्च काटकर कम से कम ₹250000 का मुनाफा कमाया जा सकता है.

इसी तरह यदि 2 एकड़ जमीन में अदरक की खेती करते हो तो सारा खर्च काटकर ₹500000 का मुनाफा कमा सकते हो.

अदरक की खेती में लागत ( ginger cultivation cost)

अदरक की खेती में कमाई करने से पहले उसका खर्च निकालना भी आवश्यक है. यदि खर्च की बात की जाय तो इस मे आपको अनेक प्रकार के खर्च करने की आवश्यकता होगी. जैसे खेत जुताई का खर्च, अदर के बीज का खर्च, रोपाई का खर्च, खाद ऊर्वरक का खर्च, कीटनाशक दवाई का खर्च, निराई का खर्च, अदरक की खुदाई का खर्च, इत्यादि है इन सभी खर्च को मिलाकर 1 एकड़ जमीन में लगभग 2 लाख के आसपास का खर्चा आ सकता है.

FAQ

अदरक की खेती कैसे करें ?

अदरक की खेती के लिए पहले खेत तेयार करना होगा. उसे के बाद बीज का चयन करना होगा. बीज का चयन करने के बाद बीज की रोपाई करनी होगी. इस तरह यह फसल 8 से 9 महीने में तेयार हो जाएगी.

एक एकड़ में कितनी अदरक निकालती है ?

एक एकड़ में 150 से 200 क्विंटल अदरक निकली जा सकती है.

अदरक की खेती किस महीने में कि जाती है ?

अदरक की खेती अप्रैल से मई महीने के अंदर की जाती है.

प्रती एकड़ अदरक की खेती में लागत ?

प्रती एकड़ अदरक मे 2 लाख रुपए की लागत लग सकती है.

अदरक की खेती से लाभ ?

एक एकड़ अदरक मे लगभग 2 लाख 80 हजार रुपए कमाया जा सकता हैं.

अदरक की फसल कितने दिन में तेयार हो जाती है ?

अदरक की फसल 8 से 9 महीने में तेयार होती है.

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